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सक्ती विधानसभा मे 14 उम्मीदवार मैदान मे: दोनों प्रमुख पार्टी के अपने ही बिगाड़ सकते है चुनावी माहौल…सट्टा भी चुनाव मे बड़ा मुद्दा

छत्तीसगढ़ में आज से पांच दिन बाद विधानसभा चुनाव होने वाला है। सभी अपने समर्थकों के साथ जनता से जन संपर्क कर रहे है। लेकिन सक्ती विधानसभा में इस बार का चुनाव रोमांचक होने वाला है क्योंकि यहां चुनावी मैदान में 14 उम्मीदवार डटे हुए है। मैदान में भले ही 14 उम्मीदवार हो लेकिन दोनों प्रमुख पार्टियों को दूसरों से ज्यादा अपनों से नुकसान होने का अनुमान है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रत्याशी बनने के लिए कई लोगों ने अपना नाम पार्टी को दिया था। लेकिन पार्टी ने पहले के चहरों पर ही दांव खेल दिया है। कांग्रेस से वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत हो चुनावी रण में उतारा गया है। वही भाजपा ने पूर्व विधायक खिलावन साहू को टिकट दी है।

टिकट मिलने से पहले दोनों प्रमुख पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शक्ति प्रदर्शन कर चुनाव लडने की इच्छा जताई थी। लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। टिकट बटवारे के बाद भी विरोध कम नहीं हुआ। टिकट ना मिलने से नाराज लोगों ने अंदर ही अंदर प्रत्याशी के खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया। आगामी चुनाव में इसका असर दिखने की पूरी संभावना है। क्योंकि टिकट ना मिलने से नाराज कुछ कार्यकर्ता पार्टी में रहते हुए अपने प्रत्याशी के खिलाफ बगावत कर रहे है।

सबसे पहले बात करते है कांग्रेस की। टिकट बटवारे से पहले कांग्रेस नेता मनहरण राठौर ने अपने समाज के लोगों से साथ शक्ति प्रदर्शन किया था। वही राजा धर्मेंद्र सिंह ने भी सैकड़ों की संख्या में आदिवासियों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। उम्मीद थी कि टिकट मिल सकती है। लेकिन टिकट नहीं मिली। कांग्रेस पार्टी ने डॉ चरणदास महंत को टिकट दे दिया। लेकिन नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है।

पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने प्रत्याशी के खिलाफ बगावत करने का मन बना लिया। राजा धर्मेंद्र सिंह ने तो टिकट बटने के बाद राजमहल मे सर्व आदिवासी समाज की एक बैठक बुलाई। इस बैठक में सर्व आदिवासी समाज ने कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ में वोट देने को कहा। जबकि धर्मेंद्र सिंह खुद भी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता है। राठौर समाज मे भी अपने समाज के व्यक्ति को प्रत्याशी नही बनाए जाने से काफी आक्रोश है। जो कही न कही इस चुनाव में अपनी छाप छोड़ सकता है।

अब बात करते है भाजपा की। भाजपा में भी प्रत्याशी पद के लिए दावेदारी करने लंबी कतार लगी हुई थी। लोगों को भरोसा था कि भाजपा इस बार किसी नए चेहरे पर दांव खेल सकती है। लेकिन भाजपा ने पूर्व विधायक खिलावन साहू को टिकट दे दिया। जिससे पार्टी के कुछ कार्यकर्ता नाखुश है। खिलावन साहू पूर्व विधायक रह चुके है।

उन्होंने 2013 विधानसभा चुनाव मे सरोजा मनहरण राठौर को हराया था। हालांकि, इसके बावजूद पार्टी ने 2018 विधानसभा चुनाव मे खिलावन साहू की टिकट काट दी और पूर्व मंत्री मेघाराम साहू को चरणदास महंत के सामने मैदान मे उतारा था। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार भी विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी को लेकर कई तरह की अटकलें लगा रहे है।

गांवों में हो रहा प्रत्याशियों का विरोध

विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही प्रत्याशी जनसंपर्क अभियान मे अपनी पूरी ताकत झोंक रहे है। लेकिन इन सब के बीच प्रत्याशियों का विरोध भी हो रहा है। सक्ती विधानसभा के कई गांवों मे कांग्रेस प्रत्याशी डॉ चरणदास महंत और भाजपा प्रत्याशी खिलावन साहू का विरोध हो रहा है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया मे वायरल हो रहा है। प्रत्याशियों के लिए यह बड़ी चुनौती है कि जिस गांवों में उनका विरोध हो रहा है। उन गांवों मे वह कैसे आम जनता को अपने पक्ष में वोट देने के लिए मनाते है।

सक्ती विधानसभा में सट्टा और समर्थक भी बड़ा मुद्दा

सक्ती विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी डॉ चरणदास महंत के समर्थकों की लंबी लाइन लगी हुई है। लेकिन इनमें से कुछ ऐसे भी है, जो चुनाव मे इनकी छवि को धूमिल कर सकते है। दरअसल, पिछले साल 6 नवंबर 2022 को सक्ती जिले में इनकम टैक्स विभाग ने छापामार कार्यवाही की थी। आईटी ने सक्ती शहर में कुल 6 लोगों के यहां छापा मारा था। इसमें सबसे खास बात यह है कि इन लोगों में अधिकतर लोग कांग्रेस प्रत्याशी डॉ चरणदास महंत के समर्थक है। आईटी की छापामार कार्यवाही मे अधिकारियों को इनके सट्टा से जुड़े होने के साक्ष्य मिले। साथ ही सट्टा खिलाने में उपयोग होने वाला लाइन सिस्टम भी जप्त किया था।

कार्यवाही के बाद इनकम टैक्स विभाग ने सक्ती थाना प्रभारी व सक्ती पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए निर्देश दिया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक इनके खिलाफ अपराध दर्ज नहीं हुआ। शहर की जनता का मानना है कि यह सभी लोग डॉ चरणदास महंत के खास समर्थक है। इसी वजह से पुलिस ने अभी तक इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है। जबकि छोटे सटोरियों पर कार्यवाही हो रही है। जनता की माने तो यह मुद्दा भी चुनाव में अपना रंग दिखा सकता है।

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