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खुद को AIIMS का डॉक्टर बताकर कोरोना मरीज को लगाया चूना…फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर परिजनों ने PM मोदी से ट्वीट कर मांगा इंसाफ

पटना:- अगर आप भी सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने जाते हैं, तो सावधान हो जाइए. क्योंकि सरकारी अस्पताल में फर्जी डॉक्टर (fake doctor) घूम रहे हैं, जो कि मरीजों को इलाज के नाम पर गुमराह कर रहे हैं. मामला पटना एम्स (AIIMS, Patna) से जुड़ा है जहां कोविड मरीज (Covid patient) के इलाज के नाम पर फर्जी डॉक्टर ने न सिर्फ मोटी रकम की ठगी की है, बल्कि एम्स की सुरक्षा में भी सेंधमारी का काम किया है. फर्जीवाड़े के बाद अब एक परिवार इंसाफ के लिए जहां महीनों से थाने से लेकर सरकार तक के चक्कर काट रहा है, वहीं पीएमओ (PMO) को भी ट्वीट कर उसने इसकी जानकारी दी है.

रोहतास की रहनेवाली साक्षी गुप्ता ने अपने पिता लालबाबू गुप्ता को कोरोना संक्रमित होने के बाद एम्स में भर्ती करवाया था. पिता को भर्ती करने के महज एक दिन बाद ही इसकी मुलाकात जय प्रकाश नामक शख्स से हुई, जिसने खुद को एम्स का डॉक्टर बताया. नियम के मुताबिक, कोरोना वॉर्ड में मरीज के अलावा परिजनों को जाने की इजाजत नहीं होती है. ऐसे में परिजनों को बाहर कैंपस में ही इंतजार करना पड़ता है, जिसका फायदा जयप्रकाश नामक शख्स ने उठाया.

जयप्रकाश ने परिचय होते ही कुछ घंटों बाद मरीज के बेड पर इलाज की तस्वीर दिखाकर साक्षी को विश्वास में ले लिया और उसके अगले ही दिन मरीज से वीडियो कॉल कर बातचीत भी करा दी. विश्वास बढ़ते ही जयप्रकाश अपने मंसूबे को सफल बनाने में जुट गया और फिर अचानक एक दिन बाद जयप्रकाश साक्षी के पास पहुंचकर बताया कि पिता लाल बाबू की हालत काफी गंभीर है. उन्हें तुरंत तीन इंजेक्शन देने होंगे. इंजेक्शन की कीमत 20 हजार से ज्यादा बताई गई. साक्षी ने तुरंत दो इंजेक्शन की राशि यानि 40 हजार रुपये जयप्रकाश को मुहैया करा दिए. पर जयप्रकाश कुछ ही घंटे बाद तीसरे इंजेक्शन की राशि मांगने पहुंच गया. तब साक्षी को शक हो गया और उसने पैसे देने से इनकार कर दिया.

साक्षी ने जब अन्य मरीज के परिजनों से जानकारी इकट्ठा की तो पता चला कि कई और लोगों से यह पैसा ऐंठ चुका है. इस बीच इलाज के दौरान ही साक्षी के पिता लाल बाबू गुप्ता की कोरोना से मौत हो गई. मौत के बाद जयप्रकाश न तो फोन उठा रहा था और न ही नजर आ रहा था ऐसे में साक्षी का शक और बढ़ गया और इसने सदमे के बाद जहां फुलवारी शरीफ थाने में आरोपी शख्स के खिलाफ मामला दर्ज करवाया, वहीं पीएम मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को ट्वीट कर पूरे मामले की जांच की मांग की. पिता की मौत के बाद पूरी तरह टूट चुकी साक्षी को तब थोड़ी राहत मिली जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे मामले पर एम्स को जांच का आदेश दिया.

सरकार के जांच के आदेश के बाद जब एम्स प्रशासन ने पूरे मामले की जांच की, तो पता चला कि जयप्रकाश नाम का शख्स एम्स में कार्यरत ही नहीं है.

हालाकि एम्स के अधीक्षक डॉ. सीएम सिंह के पास भी इन सवालों के सही से जवाब नहीं कि फर्जी शख्स जयप्रकाश कोरोना मरीज के वार्ड तक कैसे पहुंचा और अगर नहीं पहुंचा तो फिर मरीज की तस्वीर कैसे बाहर आई और वीडियो कॉल कैसे हुई? हालांकि अधीक्षक ने पहली जांच रिपोर्ट में एम्स को क्लीन चिट दे दी है और मामला पुलिस जांच पर छोड़ दिया है. पुलिसिया जांच की बात करें तो अब भी पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की है और आरोपी जयप्रकाश फरार बताया जा रहा है. वहीं पूरे मामले पर फुलवारी शरीफ एसएचओ रफीकुर रहमान ने कहा कि आरोप के आधार पर कार्रवाई जारी है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी.

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