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छत्तीसगढ़: राजधानी हॉस्पिटल के पांच संचालक डाक्टरों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज…जानिए वजह

रायपुर। रायपुर के पचपेढ़ी नाका के पास स्थित राजधानी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कोविड वार्ड में शनिवार शाम लगी भीषण आग में जलने और दम घुटने से पांच कोरोना मरीजों की मौत के मामले में अपराध दर्ज किया गया है। टिकरापारा थाना पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन किसी की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो सकी है। इससे पुलिस पर सवाल उठने लगे है।

इस अस्पताल को शहर के पांच डाक्टर मिलकर संचालित करते हैं, लिहाजा पांचों को मामले में आरोपित बनाया गया है। कल रात में ही अस्पताल को पूरी तरह से खाली कराकर उसे सील कर दिया गया था। अब पुलिस अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वजनों का बयान दर्ज कर रही है। फिलहाल दो-तीन लोगों का बयान दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में साफ हो गया है कि इसी महीने कोविड अस्पताल के रूप में सूचीबद्व इस अस्पताल में आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं किए गए थे।

इमरजेंसी एग्जिट और वेंटिलेशन का भी इंतजाम नहीं मिला। जब अस्पताल के दूसरे व तीसरे माले में स्थित कोविड वार्ड (आईसीयू) शार्ट सर्किट से आग लगी, तब अस्पताल के सारे कर्मचारी और जिम्मेदार लोग भाग निकले थे। वार्ड में भर्ती 50 से अधिक मरीजों को कोई भी बचाने की कोशिश ही नहीं की। मरीजों के स्वजन चिखते-चिल्लाते रहे, पर किसी की संवेदनाएं न जागी और न कोई फर्क पड़ा। इस अस्पताल को शहर के पांच डाक्टर मिलकर संचालित करते है। वे भी घटना के बाद अस्पताल नहीं पहुंचे थे।

टिकरापारा पुलिस थाना प्रभारी संजीव मिश्रा ने बताया कि दुर्गा चौक, भाठागांव निवासी नरोत्तम प्रसाद सोनकर की शिकायत पर अस्पताल प्रबंधन पर केस दर्ज किया गया है। नरोत्तम ने अपनी शिकायत में बताया कि उसके पिता भक्तशरण सोनकर का स्वास्थ खराब होने पर 14 अप्रैल को पचपेढी नाका के पास राजधानी अस्पताल में इलाज कराने ले गया था। टेस्ट कराने पर डाक्टर द्वारा कोरोना पाजिटिव होना बताया गया था।

दूसरे दिन ही पिता को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था, जो अस्पताल के दूसरे तल के एसआईसीयू वार्ड के कमरा नंबर 115 में भर्ती थे। शनिवार की शाम सवा चार बजे वह अस्पताल के बगल में ग्रेनाइट दुकान के बाहर बैठा था, तभी अस्पताल के दूसरे मंजिल से धुंआ निकलते देखा तो दौड़कर अस्पताल के अंदर गया। वहां काफी अफरा-तफरी थी। लोग चिल्ला रहे थे, कि आग बुझाओ।

नरोत्तम दौडते हुए आईसीयू वार्ड में पहुंचा। देखा कि वार्ड में काफी धुंआ भरा हुआ था। आग लगी हुई थी। किसी तरह वह अपने पिता भक्तशरण सोनकर को उठाकर नीचे लेकर आया। उनका चेहरा काला पड़ गया था। एक एंबुलेंस में डालकर तुरंत संजीवनी अस्पताल दावड़ा कालोनी ले गया। वहां डाक्टर ने चेक कर बताया कि मौत हो गई है। अस्पताल में अग्निशमन की कोई व्यवस्था और वहां पर आग बुझाने का कोई संयंत्र नहीं होने से कोविड वार्ड में भर्ती पांच मरीजो की मौत अस्पताल प्रबंधन के लापरवाही पूर्वक असुरक्षा के कारण ही हुई है।

नरोत्तम को बाद में जानकारी मिली कि अस्पताल में भर्ती वंदना नाम की महिला, रमेश साहू, ईश्वर राव, देवकी सेानकर की भी आग में झुलसने और दम घुटने से मौत हुई है। मामूली रूप से झुलसे सभी मरीजों को दूसरे अस्पताल में कल ही शिफ्ट किया जा चुका था।

सीएमएचओ की जांच रिपोर्ट का इंतजार

राजधानी सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल में हुई भीषण आग में कल तक चार मरीजों की मौत की जानकारी देने वाले अस्‍पताल प्रबंधन ने आज यह भी स्वीकार लिया है कि हादसे में पांच मरीजों की मौत हुई है। अस्पताल प्रबंधन के ख़िलाफ़ पृथक से सीएमएचओ जांच कर रही हैं, उनके जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद प्रकरण में पुलिस धाराएं बढ़ा सकती हैं। शुरुआती दौर में ही पांच मरीजों की जलने से मौत की सूचना आई थी, जिसे प्रबंधन ने चार बताया था। लेकिन फिर प्रबंधन ने स्वीकार कर लिया कि रमेश साहू की मौत जलने से जबकि एल ईश्वर राव,वंदना गजमाला, देवकी सोनकर और भाग्यश्री की मौत धुएं से दम घुट जाने की वजह से हुई है।

28 घंटे भूखे-प्यासे बैठे रहे स्वजन, शाम को मिला शव

अस्पताल में अग्निकांड के 28 घंटे बाद पांचों मृतकों के शव उनके स्वजनों को सौंप दिया गया। शव के लिए परिजन अंबेडकर अस्पताल की मरच्यूरी के बाहर सुबह से लेकर शाम तक भूखे-प्यासे इंतजार में बैठे रहे। रविवार शाम करीब छह बजे पांचों मृतकों के शव उनके स्वजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम में देरी की वजह से परिजन बेबस होकर पार्थिव देह मिलने के इंतजार में थे। इधर घटना के एक दिन बाद भी मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। सूत्रों ने बताया कि एक मरीज की मौत आग लगने की वजह से जान बचाकर भागने के दौरान हुई थी, हालांकि इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से अफसर बच रहे हैं।

पुलिस कप्तान ने कहा-बढ़ेगी धारा

एसएसपी अजय यादव ने बताया अस्पताल प्रबंधन के ख़िलाफ़ प्रारंभिक तौर पर गैर इरादतन हत्या का अपराध दर्ज कर जांच की जा रही है। सीएमएचओ की रिपोर्ट के आधार पर यह देखा जाएगा कि, कोई अन्य धाराएं आकर्षित होती है या नहीं। यह अस्पताल 2014 से रजिस्टर्ड है और बीते आठ अप्रैल को कोविड सेंटर के रुप में सूचीबद्ध हुआ है। इसके संचालकों में डा. सचिन माल, डा. संजय जाधवानी, डा.विनोद लालवानी और डा.अनिंदो राय के नाम शामिल हैं।

राहुल गांधी ने हादसे पर दुख जताया

इस हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी दुख जताया है। राहुल गांधी ने लिखा-रायपुर में अस्पताल में आग लगने की ख़बर दुखद है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों को मेरी संवेदनाएं। राज्य सरकार से अपील है कि शोकग्रस्त परिवारों को इस कठिन समय में सभी सहायता दी जाए।

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