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कोरोना गया नहीं की नया खतरा: पहली बार इंसानों तक पहुंचा बर्ड फ्लू H5N8…इंसानों में बर्ड फ्लू का वायरस पहुंचने से हड़कंप…पोल्ट्री फार्म के सात लोग संक्रमित

SNN24 NEWS DESK:- रूस में इंसानों में बर्ड फ्लू के वायरस के ट्रांसमिशन का पहला मामला सामने आया है। रूस ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि H5N8 एवियन फ्लू यानी बर्ड फ्लू का वायरस इंसानों में पाया गया है।

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रूस के रिसर्च सेंटर वेक्टर के वैज्ञानिकों ने शनिवार को जानकारी दी कि एक पोल्ट्री फार्म के सात कर्मचारी बर्ड फ्लू से संक्रमित पाए गए हैं। रोसपोत्रेनादज़ोर के वेक्टर रीसर्च सेंटर ने इंसानों में इस वायरस की खोज की है।

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अन्ना पपोवा ने रशिया 24 ब्रोडकास्टर को जानकारी दी कि दिसंबर के महीने में रूस के दक्षिण में एक पोल्ट्री में इस महामारी ने दस्तक दी थी। वहीं काम करने वाले सात लोग इस वायरस की चपेट में आए हैं। अन्ना पपोवा ने कहा, “संक्रमित सभी लोग ठीक हैं। उन्हें बेहद हल्के लक्षण हैं।”

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वैज्ञानिक अन्ना पपोवा के अनुसार दिसंबर के महीने में रूस के दक्षिण में एक पोल्ट्री में इस महामारी ने दस्तक दी थी। वहीं काम करने वाले सात लोग इस वायरस से संक्रमित हो गए हैं। पापोवा ने कहा कि नमूने को डब्ल्यूएचओ भेज दिया गया है।

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इंसानों में बर्ड फ्लू पहुंचने का पहला मामला

पापोवा ने कहा कि यह विश्व में पहला मामला है जब बर्ड फ्लू का वायरस मनुष्य में प्रवेश कर गया हो। उन्होंने कहा कि यह पक्षी के लिए तो बेहद खतरनाक है लेकिन अब आगे देखना होगा कि यह मनुष्य को किस तरह से हानि पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि अगर यह मनुष्य से मनुष्य में म्युटेट करता है तो खतरनाक साबित हो सकता है। पापोवा ने वैज्ञानिक के इस सफलता पर बधाई भी दी।

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डब्ल्यूएचओ के अनुसार, आमतौर पर लोग जानवरों या दूषित वातावरण के सीधे संपर्क में आने से संक्रमित हो तो जाते हैं, लेकिन मनुष्यों में कोई निरंतर संचरण नहीं होता है।

बर्ड फ्लू का यह स्ट्रेन बेहद संक्रामक है और पक्षियों के लिए जानलेवा होता है, लेकिन यह पहले कभी इंसानों में नहीं फैला था। रूस के स्वास्थ्य निगरानी विभाग के प्रमुख अन्ना पोपोवा ने कहा कि इसके वैज्ञानिकों ने वेक्टर लैब में एक पोल्ट्री फार्म के सात कर्मचारियों से स्ट्रेन का जेनेटिक मैटिरियल आइसोलेट किया है। यहां दिसंबर में बर्ड फ्लू फैला था।

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WHO की वेबसाइट के मुताबिक, A (H5) वायरस से मानव संक्रमण दुर्लभ होते हैं और अक्सर उन लोगों में यह पाया जाता है जो बीमार या मरे हुए संक्रमित पक्षियों के संपर्क में रहते हैं। इससे इंसानों में भी गंभीर बीमारी या मौत हो सकती है। 2014 से नवंबर 2016 के बीच एवियन फ्लू H5N6 के 16 केस सामने आए हैं, जिनमें से 6 की मौत हो गई।

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