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रायपुर में रोजाना हो रहे सात हजार टेस्ट…चार दिन बाद मिल रही रिपोर्ट

रायपुर। राजधानी रायपुर में रोजाना औसतन सात हजार कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं। इसमें लगभग 50 फीसद से ज्यादा कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। आरटीपीसीआर जांच करवाने की रिपोर्ट तीन से चार दिन यानी 72 घंटे के बाद मिल रही है। वहीं, रैपिड टेस्ट की रिपोर्ट आधे घंटे में मिल जा रही है, लेकिन रैपिड टेस्ट को ज्यादा कारगर नहीं माना जा रहा है। इसलिए आरटीपीसीआर की जांच लो करवा रहे हैं।

प्रदेश में रोजाना लगभग 45,000 जांच हो रही है। इसमें 12 से 15 हजार कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं। रायपुर जिले में तकरीबन 10 हजार से ज्यादा सैंपल की रिपोर्ट लंबित है। एक अनुमान के मुताबिक, अभी रोजाना 10 हजार लोग कोरोना की जांच कराने के लिए पहुंच रहे हैं, पर कोरोना जांच किट की सप्लाई कम होने से कइ लोगों को लौटना पड़ रहा है।

सुबह से शाम हो जा रही जांच के इंतजार में

राजधानी में अलग-अलग जगह पर कोरोना जांच के सेंटर बनाए गए हैं, जहां सैंपल लिया जा रहा है। इसमें कालीबाड़ी जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, एम्स, आयुर्वेद कॉलेज, आंबेडकर अस्पताल में भर्ती होने के बाद कोरोना की जांच के सैंपल लिए जा रहे हैं। आलम यह है कि लोग सुबह से ही जांच के लिए पहुंच जा रहे हैं, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा रहती है कि सुबह से शाम हो जा रही है।

कई लोग तो बिना जांच कराए वापस आ जा रहे हैं। दूसरे दिन जा रहे हैं। जिनकी रिपोर्ट दो से तीन दिनों में जारी की जा रही है। बता दें कि रिपोर्ट देर से आने के कारण भी कई मरीजों की हालत खराब हो रही है। मामले में सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल का कहना है कि जांच किट जितनी है, उससे अधिक लोग जांच कराने पहुंच रहे हैं, इसलिए कुछ जगहों पर दिक्कत हो जाती है।

आठ से 24 घंटे में मिल जाती है रिपोर्ट, पर यहां इतनी देरी :

आरटीपीसीआर की बात करें तो आठ से 24 घंटे के अंदर सैंपल की रिपोर्ट आ जानी चाहिए। लेकिन यहां 72 घंटे के बाद भी रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है।

निजी अस्पतालों की लैब में भी हो रहा टेस्ट :

सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों की लैबों में कोरोना जांच की जा रही। हालांकि, वहां रिपोर्ट समय पर मिल जा रही, जिससे इलाज भी जल्द शुरू हो जा रहा है।

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